क्राउडफंडिंग, इसके प्रकार और महत्व

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क्राउडफंडिंग, इसके प्रकार और महत्व

किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए पैसों की जरूरत होती है। बड़ी कंपनियां शेयरों और बैंकों से ऋण लेकर पैसे जुटाती हैं, लेकिन यदि कोई छोटा उद्यम ऋण न लेना चाहता हो, तो वो क्राउडफंडिंग का सहारा ले सकते हैं, इसलिए इस लेख के माध्यम से आपको क्राउडफंडिंग की जानकारी दी जा रही है।

क्राउडफंडिंग (जन-सहयोग)

क्राउडफंडिंग एक प्रकार का व्यावसायिक निवेश होता है। इसमें निवेशकों का एक समूह अधिशेष पूंजी को उन व्यावसायिक उपक्रमों में निवेश करता है, जिन्हें फंड की नियमित रूप से आवश्यकता होती है। इसके तहत बड़ी संख्या में लोगों से ऑनलाइन छोटी राशि योगदान स्वरूप ली जाती है। यह किसी व्यापार की निधि बढ़ाने का कम लागत वाला और प्रभावी तरीका है। निवेशक विभिन्न वेबसाइटों के माध्यम से परियोजनाओं और व्यवसायों में निवेश कर सकते हैं और छोटे उद्यमियों को अपने व्यवसायों के लिए निधि प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। ये वेबसाइटें एनजीओ को भी पैसे जुटाने में मदद करती हैं और चिकित्सा उपचार, शिक्षा के वित्त पोषण या आपदा राहत जैसे विभिन्न सामाजिक कार्यों के वित्तपोषण में सहायक होती हैं।

क्राउडफंडिंग के प्रकार

मुख्य रूप से क्राउडफंडिंग चार प्रकार की होती है, जो हैं –

दान-आधारित क्राउडफंडिंग – डोनेशन-बेस्ड क्राउडफंडिंग (दान-आधारित क्राउडफंडिंग) चैरिटेबल डोनेशन के समान ही होती है। इस प्रकार की फंडिंग में प्रचारक मुख्य रूप से सामाजिक कार्यों के लिए पैसों का उपयोग करता है जैसे कि उपचार, गरीबों की शिक्षा के वित्त पोषण, आपदा राहत आदि। इसमें प्रचारक को दानकर्ता को पैसे वापस नहीं करने होते हैं।

पारितोषिक-आधारित क्राउडफंडिंग – रिवॉर्ड-बेस्ड क्राउडफंडिंग (पारितोषिक-आधारित क्राउडफंडिंग) में रिटर्न रिवॉर्ड-लिंक्ड अर्थात पारितोषिक से जुड़ा हुआ होता है और उस प्रोजेक्ट पर निर्भर करता है, जिसे आप फंडिंग कर रहे हैं। यह दान आधारित क्राउडफंडिंग के समान होता है, क्योंकि इसमें आपको निवेशित पूंजी या इक्विटी पर रिटर्न नहीं मिलता।

निवेश-आधारित क्राउडफंडिंग – निवेश-आधारित क्राउडफंडिंग मेंआप किसी व्यवसाय में निवेश कर सकते हैं और बदले में इक्विटी प्राप्त कर सकते हैं। निवेश का यह मॉडल मुख्य रूप से भविष्य में उद्यम के सफल होने की क्षमता और इसके शेयर मूल्यों के मूल्यांकन पर आधारित होता है।

पीयर-टू-पीयर लेंडिंग – इसे ऋण-आधारित क्राउडफंडिंग मॉडल के रूप में भी जाना जाता है। यह भारत में क्राउडफंडिंग का एक बहुत ही सामान्य रूप है, जो इच्छुक ऋणदाता को अपनी पसंद के प्रोजेक्ट या व्यवसाय में निवेश करने की सुविधा देता है। इसमें निवेशक को निवेशित राशि पर ब्याज मिलता है और उद्यमियों को बाजार की तुलना में कम ब्याज दर पर फंड। निवेश का यह मॉडल दोनों पक्षों को लाभान्वित करता है। इसमें कोई बिचौलिया नहीं होता, जिसके परिणामस्वरूप ब्याज दर कम होती है। हाल ही में आरबीआई ने पी2पी उधार की निगरानी और इसे नियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।

क्राउडफंडिंग कैसे काम करती है?

क्राउडफंडिंग में मुख्य रूप से किसी विशेष परियोजना या किसी व्यावसायिक उद्यम के लिए निवेशकों से छोटी मात्रा में पैसे एकत्र किये जाते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से उन छोटे व्यवसायों द्वारा किया जाता है, जिनकी फंड बढ़ाने के लिए शेयर बाजार तक पहुंच नहीं होती है। क्राउडफंडिंग, बैंक ऋण के बिना व्यापार के विस्तार या कार्यशील पूंजी की व्यवस्था करने का एक अच्छा तरीका है। क्राउडफंडिंग मुख्य रूप से ऑनलाइन वेबसाइटों के माध्यम से की जाती है। यह वेबसाइटें व्यवसायों को लोगों से पैसे जुटाने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। आप इन साइटों के जरिए उस व्यवसाय का अवलोकन कर सकते हैं, जिसमें आप निवेश करना चाहते हैं। हालांकि किसी परियोजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने या उसमें निवेश करने के लिए आपको वेबसाइट में पंजीकरण करना होता है। फंड राइजिंग अभियानों में मुख्य रूप से व्यवसाय की जानकारी दी जाती है, इसमें व्यवसाय का अवलोकन, व्यवसाय योजना, प्रबंधन विवरण और उन पैसों के बारे में जानकारी होती है, जो परियोजना के लिए आवश्यक होते हैं। कंपनियों या उद्यमों द्वारा निवेश के बदले निवेशकों को रिवॉर्ड, इक्विटी आदि की पेशकश की जाती है। यदि आप इस तरह के व्यवसायों में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको निम्न चीजें के बारे में जानकारी होनी चाहिए –

  • फंड राइजिंग के जरिए उद्यम कितना पैसा जुटाना चाहता है?
  • उसने अभी तक कितना पैसा जुटाया है?
  • वह रिवॉर्ड या इक्विटी में से किसकी पेशकश कर रहा है?
  • निवेश का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा?
  • कितने लोग परियोजना में निवेश कर चुके हैं?
  • क्या निवेश आपके लिए लाभदायक है?

स्टार्टअप के लिए क्राउडफंडिंग कैसे करें?

स्टार्टअप और छोटे व्यवसाय वेब-आधारित प्लेटफार्मों का उपयोग करके संभावित निवेशकों को आकर्षित करके पैसे जुटाते हैं। क्राउडफंडिंग वेबसाइटें आमतौर पर इन व्यवसायों से शुल्क लेती हैं। भारत में रिवार्ड-आधारित क्राउडफंडिंग और डोनेशन क्राउडफंडिंग आम बात है। इस तरह की फंडिंग मुख्य रूप से सामाजिक कार्यों के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए उपयोग की जाती है। इच्छुक निवेशक इन प्लेटफार्मों के माध्यम से पैसा निवेश कर रखते हैं। क्राउडफंडिंग प्लेटफ़ॉर्म कुछ पैसे काट कर शेष राशि स्टार्टअप को दे देते हैं। पैसे जुटाने के लिए स्टार्टअप्स को निवेशकों को अपडेट करने और जानकारी देने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ ही अपने व्यावसायिक लक्ष्यों को बढ़ाने और प्राप्त करने पर भी जोर देना पड़ता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में क्राउडफंडिंग उद्योग 300 करोड़ रुपये का है। नीचे शीर्ष 10 क्राउडफंडिंग वेबसाइटों की जानकारी दी जा रही है, जो चिकित्सा आपात स्थिति, रचनात्मक उद्यम, स्टार्टअप, सामाजिक कार्यों, शिक्षा और यहां तक ​​कि व्यक्तिगत जरूरतों के लिए पैसे जुटाने में मदद करती हैं। भारत के शीर्ष 10 क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म निम्न हैं –

  • केटो (Ketto)
  • मिलाप (Milaap)
  • इंपेक्ट गुरु (ImpactGuru)
  • विशबरी (Wishberry)
  • फ्यूल ए ड्रीम (Fuel A Dream)
  • ड्रीम वॉलेट (Dream Wallets)
  • बिट गिविंग (BitGiving)
  • द होट स्टार (TheHotStart)
  • कैटापोल्ट (Catapooolt)
  • स्टार्ट51 (Start51)

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