जानिए हेल्थ इंश्योरेंस में प्री इंश्योरेंस मेडिकल चेक-अप के बारे में

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Pre Insurance Medical Check-Up

स्वास्थ्य बीमा योजनाएं भविष्य की चिकित्सा आपात स्थितियों में बहुत ही मददगार साबित होती हैं। ये योजनाएं पॉलिसीधारकों को अपना पैसा खर्च किए बिना चिकित्सा बिलों का भुगतान करने की सुविधा देती हैं। अर्थात स्वास्थ्य योजनाएं चिकित्सा खर्च के प्रति कवर प्रदान करती हैं। हालांकि बीमाकर्ता ग्राहकों को पॉलिसी जारी करने से पहले प्री मेडिकल चेकअप और परीक्षण की सलाह देते हैं। इसलिए इस लेख के माध्यम से हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि स्वास्थ्य बीमा योजना में प्री मेडिकल चेकअप कितना जरूरी होता है और इससे क्या लाभ और हानि होती है।

मेडिकल टेस्ट कराने से डरें नहीं

आवेदक की स्वास्थ्य स्थिति को समझने के लिए बीमा कंपनियों द्वारा पॉलिसी जारी करने से पहले आवेदक का मेडिकल चेकअप कराया जाता है। ग्राहकों को कवरेज प्रदान करने के लिए बीमा कंपनियां कई पात्रता मानदंड निर्दिष्ट करती हैं। आपकी उम्र, लिंग, जीवनशैली, आदतों और प्रीमियम के भुगतान के आधार पर बीमा कवरेज तय किया जाता है। पॉलिसी जारी करने से पहले आमतौर पर विशेष आयु से अधिक उम्र के व्यक्ति का मेडिकल चेकअप किया जाता है। आमतौर पर बीमा कंपनियां 40 से अधिक उम्र के ग्राहकों को पॉलिसी जारी करने से पहले मेडिकल टेस्ट के लिए कहती हैं।

मेडिकल टेस्ट कराने से ग्राहकों को क्या लाभ होता है?

आज के समय में बाजर में कई प्रकार के बीमा उत्पाद मौजूद हैं। हर बीमा कंपनी अपनी तरफ अधिक-से-अधिक ग्राहकों को आकर्षित करना चाहती है। बीमा कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए स्वयं ग्राहकों के चिकित्सा परीक्षण के खर्च का भुगतान करती हैं। पॉलिसी जारी करने से पहले मेडिकल जांच कराकर बीमा कंपनियां ग्राहकों की स्वास्थ्य स्थिति जानना चाहती हैं। स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर ही कवरेज और प्रीमियम राशि तय होती है। लोग अक्सर सोचते हैं कि मेडिकल टेस्ट में यदि कोई बीमारी या परेशानी सामने आती है, तो बीमा कंपनियां आवेदन को अस्वीकार कर देती हैं। हालांकि अधिकतर मामलों में ऐसा नहीं होता है। जब व्यक्ति की स्थिति बहुत ही खराब होती है, तो आवेदन को अस्वीकार करना बीमा कंपनियों की जरूरत बन जाती है। इसके विपरीत मेडिकल टेस्ट कराने से आपको पर्याप्त कवरेज लेने में मदद मिलती है और आपको अपने स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी भी हो जाती है, जिससे आप आगे के लिए सतर्क रह सकते हैं। पॉलिसी देने से पहले मेडिकल टेस्ट कराने से बीमा कंपनियों को आवेदक के स्थास्थ्य के बारे में जानकारी हो जाती है और इसके अनुसार वे पॉलिसी से संबंधित विभिन्न निर्णय सही तरीके से ले पाती हैं। उदाहरण के लिए धूम्रपान करने वालों को अधिक प्रीमियम राशि का भुगतान करना होता है। इस तरह की आदत को केवल मेडिकल टेस्ट के जरिए पहचाना जा सकता है। मेडिकल टेस्ट के माध्यम से पहले से मौजूद अन्य बीमारियों की भी पहचान की जा सकती है। इस तरह से कंपनी अपने हितों की रक्षा कर सकती है। मेडिकल टेस्ट दावा निपटान की प्रक्रिया को भी आसान बनाता है।

मेडिकल टेस्ट के बाद क्या होता है?

गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों की पहचान करने के लिए पॉलिसी जारी करने से पहले मेडिकल चेकअप किया जाता है। कभी-कभी टेस्ट के परिणाम उन आवेदकों को चकित कर देते हैं, जो पहले अपने स्वास्थ्य की स्थिति से अनजान थे। इसलिए यदि आपके मेडिकल टेस्ट में किसी गंभीर बीमारी या जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां सामने आती हैं, तो कंपनी निम्न कदम उठा सकती है –

स्वास्थ्य बीमा की प्रीमियम राशि में वृद्धि – यदि मेडिकल टेस्ट में आपको कुछ बीमारी होने की बात सामने आती है, तो बीमा कंपनियां उच्च प्रीमियम लेकर आपको पॉलिसी जारी कर सकती हैं। इसके साथ ही ग्राहक की उम्र और बीमारी की गंभीरता के आधार पर बीमा प्रीमियम तय किया जाता है।

स्थायी रुप से मना कर देना – कभी-कभी बीमा कंपनियां इस शर्त के साथ बीमा कवरेज प्रदान करती हैं कि बीमा कंपनी पहले से मौजूद बीमारियों या मेडिकल टेस्ट के दौरान सामने आई बीमारियों के भुगतान के लिए उत्तरदायी नहीं होगी। हालांकि ऐसा तब होता है, जब बीमाकर्ता बीमारी को बहुत जोखिम भरा मानता है। इस स्थिति में पॉलिसीधारक निर्दिष्ट बीमारी के खर्च के लिए दावा नहीं कर सकता है।

अस्वीकृति – कभी-कभी किसी को ऐसी बीमारी होने का पता चलता है, जिससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है या जिसके इलाज में बहुत लागत आने की संभावना होती है। ऐसी स्थिति में बीमा कंपनियां आवेदक को पॉलिसी जारी करने से इनकार कर सकती हैं।

दावा अस्वीकार होने की संभावना होती है कम

लोग अक्सर मेडिकल जांच कराने से डरते हैं। वे मेडिकल जांच कराने में सहज महसूस नहीं करते हैं। इसके साथ ही बीमा के लिए आवेदन करने वाले ग्राहक भी मेडिकल जांच कराने के परहेज करते हैं, क्योंकि इसे वे अपने आवेदन की स्वीकारता के लिए एक बाधा की तरह मानते हैं। वो सोचते हैं कि इससे उनका प्रस्ताव अस्वीकार किया जा सकता है। लेकिन पॉलिसी लेने से पहले अपनी मेडिकल जांच कराना हमेशा आपके फायदे में होता है। भले ही आपको कभी-कभी ऐसा करने के बाद अधिक प्रीमियम का भुगतान करना पड़ सकता है, लेकिन इससे आपको अपनी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी हो जाती है और जब बीमा कंपनी एवं आपको अपने बारे में सही और पूरी जानकारी होती है, तो इससे भविष्य में दावा निपटान के दौरान विवाद या भ्रम की स्थिति नहीं बनती है, अर्थात मेडिकल टेस्ट दावा निपटान के दौरान पॉलिसीधारक को दावा अस्वीकार से बचाता है।

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